जेल से जेल तक...। जेल से जेल तक...।
एक दुविधा...। एक दुविधा...।
उम्मीद की एक किरण। उम्मीद की एक किरण।
जेब को सोखती दोपहर...। जेब को सोखती दोपहर...।
और दोनों बातें करते रहे ( बैकग्राउंड में उनका लिखा गाना बजता है ) और दोनों बातें करते रहे ( बैकग्राउंड में उनका लिखा गाना बजता है )
जीवन के उल्लास का अद्भुत और अपूर्व आनन्द ले रहे नितिन बाबू छत पर खड़े पतंगों के पेंच, लहराव और तुनकि... जीवन के उल्लास का अद्भुत और अपूर्व आनन्द ले रहे नितिन बाबू छत पर खड़े पतंगों के ...